काटोल विधान सभा में जनता किस प्रकार अपना मत बदलती है जाने

*काटोल विधानसभा जनता का मूड और मत ?* राष्ट्रीय पार्टीओं में गुणा भाग से चुनाव परिणाम की तस्वीर बदलने वाली है 27 वर्षिय युवा *यज्ञवल्क्य* श्रीकांत जिचकार आजनगाँव, काटोल के रहने वाले इनके पिता *श्रीकांत जिचकार* कांग्रेस की महाराष्ट्र सरकार में गृह मंत्री रह चुके हैं भाजपा ने टिकट का आफर किया जिसे यज्ञवल्क्य ने ठुकरा दिया कांग्रेस पार्टी के करीबी होने के बाद भी जनता मे अपनी विशिष्ट पहचान बनाये हुए रखने के लिये *निर्दलीय प्रत्याशी* के रूप में काटोल विधानसभा में सबसे मजबूत स्थिति में हैं जिसके चलते भाजपा व एनसीपी (शरद पवार) प्रत्याशी की मुसीबत बढ गयी है भाजपा प्रत्याशी *चरण सिंह ठाकूर* पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं किंतु हार गये थे वहीं एनसीपी प्रत्याशी *सलिल देशमुख* पूर्व गृह मंत्री अनील देशमुख के सुपुत्र है ज्ञात हो कि अनील देशमुख के उपर पुलिस विभाग मुंबई के कमिश्नर परब द्वारा प्रतिमाह *100 करोड़* की वसूली मांगने का आरोप लगाया था उसके बाद ईडी द्वारा अनील देशमुख को गृह मंत्री रहते ही गिरफ्तार कर 11 माह जेल में रखा था बाद में वे अभी जमानत पर बाहर हैं किंतु केस चल रहा है एैसी स्तिथि में उनके सुपुत्र का चुनाव मैदान में आना जनता को पच नहीं रहा है किंतु अनिल देशमुख ही इस विधान सभा में सबसे ज्यादा बार विधायक चुनकर आये हैं अनिल देशमुख पर जब 100 करोड़ की वसूली का आरोप लगा तो इसमे राजनैतिक साजिश को नकारा नहीं जा सकता है इसलिए NCP शरद पवार गुट प्रत्याशी सलिल युवा होने का फायदा भी मिलेगा इधर भाजपा प्रत्याशी पहले नगर परिषद काटोल मे निर्दलीय अध्यक्ष रह चुके जिनका कार्यकाल देख चुकी जनता उन्हें निष्पक्ष छवि का मानती थी किन्तु अब उन्हें बीजेपी प्रत्याशी बनाये जाने पर जनता हिचकिचाते हुए दूरी बनाये हुए हैं किंतु इस बीच भाजपा प्रत्याशी चरण सिंह ठाकूर ने विगत दो वर्षो से भाजपा गठबन्धन सरकार के रहते काटोल और नरखेड में ग्रामीण विकास के लिए जो प्रयास किए वो सरहनीय हैं इस प्रकार काटोल की जनता का मिजाज देखें तो ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनता राष्ट्रीय और क्षेत्रिय पार्टीओं की पालिसी से सहमत नहीं हैं और निर्दलीय प्रत्याशी पर ज्यादा भरोसा करती है जिसका ट्रेलर यज्ञवल्क्य श्रीकांत जिचकार की नामंकन रैली मे दिखाई दिया है या ये कहा जा सकता है कि किसी भी पार्टी में जनता के मूड को समझने की क्षमता नहीं है अब आने वाले समय में चुनाव प्रचार जैसे जैसे जोर पकड़ेगा वैसे वैसे जनता अपना रुख बदलेगी या स्थिर रखेगी ये वक्त बतायेगा

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