*बरसो की मांग है विदर्भ राज्य* की किंतु *बाला साहब* के रहते तक *भाजपा* इस पर कुछ नहीं कर पायी क्यूकि *बाला साहब शेर थे* और *भाजपा* को उनकी आवश्यकता थी फिर उनके रहते निर्णय लेना सम्भव नहीं था उनका मानना था कि छोटे राज्यों का *भारत संघ राज्य* में वजूद रखना सम्भव नहीं हो सकता *48 सांसद* की टोली से *केन्द्र* पर दबाव रहता है क्योंकि बाला साहब पक्के हिंदू *देश भक्त* और *मराठी मानुस* थे *कांग्रेस* की *प्रतिभा पाटिल* सेखावत को अपने गटबन्धन से बाहर जा कर *राष्ट्रपति* बनने समर्थन किया था हालांकि भाजपा प्रचार में ये संदर्भ चलाती रही और खुद *बाला साहब* के वाक्य थे कि वे शिवसेना का कांग्रेस नहीं होने देंगे किंतु प्रतिभा पाटिल के मामले में वे भी शिथिल पड़ गये थे कांग्रेस का खुल कर समर्थन किया था पर *विदर्भ राज्य* के विषय में सोचे तो बड़े नेताओं के मतो से भिन्न जनता के लिए विकास का बड़ा मार्ग होगा अब परिस्थिति देखें तो भाजपा + शिन्दे + अजीत = 230 का आंकडे के पार हैं पर समस्या CM पद को लेकर भी खड़ी है जो पहले CM थे वे डिप्टी हुए और अब फिर रिवर्स फार्मूला जो CM हैं उन्हें डिप्टी बनाने की ओर अग्रसर हैं और विभागो का बंटवारा किंतु इस बीच भाजपा गठबन्धन ने महाराष्ट्र का दो राज्य बनाने के फार्मूला पर विचार भी आवश्यक है क्योंकि ये बात समझने योग्य हैं कि जब राज्य बड़े होंगे तो उन्हें सम्भालने मे भी उतनी ही कठीनायी होती है कांग्रेस आजादी के बाद से 50 वर्षो तक बड़ी पार्टी रही देश में राज किया किसी की नहीं सुनी और पतन हो गया अब भाजपा भी अकेले के दम पर नहीं कर पा रही है तो जनता के हितो की सोचना चाहिए कि अपने अहम को छोड़ने की आवश्यकता है प्रायोगिक तौर पर देखें तो हमे समझ आयेगा कि हमारा देश बोलने के लिए दुनिया सबसे बड़ा देश है जहां लोकतंत्र है किंतु क्या हम वास्तविक तौर पर विकास कर पाये हैं क्या? आज हमारे देश *भारत पर कुल कर्ज़* *205 लाख करोड़* रुपये है जो प्रति व्यक्ति *1.40 लाख रुपये* है *1 डॉलर* पाने हमें *84.56 भारतीय रुपया* देना होता है ये हमारा आजादी के बाद से अब तक 73 वर्षो का विकास है *नेता नारा पार्टी* का प्रभाव इतना विकृत है कि विकास की सही परिभाषा ही दब गयी है समानान्तर विकास की सोच ही विकसित नहीं हो पायी बस राजनैतिक लालसा के चक्कर में जनता को पीछे ढकेल दिया किसी पार्टी को नीचे दिखा दिया धर्म ,जाती ,वर्ग में ही उलझते रहते हैं इसलिए *भारत की प्रतिभायें विदेश पलायन कर गयी* *आजादी* के समय जो *1 डॉलर का मूल्य 3.30 रुपये* था अब *84.54* रुपये कैसे हो गया इस पर किसी दल का कोई ध्यान नहीं केवल दल-दल की सोच रहे हैं इसलिए अब समय आ गया है कि सही राजनैतिक निर्णय लेने का कि जैसे स्व अटल बिहारी बाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए तीन नये राज्य बनाये वैसे ही महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के भी नये राज्य कर दिया जाये तो राजनीतिक महत्वाकांक्षा की समस्या को दूर करते हुए विकास पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके I